भाग्य ही कर्मों का निर्माण करते हैं. कर्म ही तय करते हैं कि भाग्य कब तक साथ देगा. अगर कर्म नहीं तो भाग्य नहीं. भाग्य की कर्म को दिशा देते हैं. अगर कर्म अच्छे नहीं तो अच्छे भाग्य की उम्मीद करना भी गलत है. कर्म निर्धारित करते हैं भाग्य की दशा और दिशा क्या होगी. लोग अकारण ही सोचते हैं रहते हैं कि भाग्य साथ नहीं दे रहा. भाग्य तब साथ देगा जब कर्म होगा, चिंता कोई कर्म नहीं है. मेहनत ही भाग्य का विधाता है. इसलिए कर्म करें, तभी भाग्य संवरेगा. देखिए मैं भाग्य हूं के इस खास कार्यक्रम में कैसे निर्धारित करते हैं कर्म भाग्य को.from आज तक | http://bit.ly/2wkgsBE
via IFTTT
No comments:
Post a Comment